UGC Equity Regulations पर बढ़ा बवाल, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दी सफाई

राघवेन्द्र मिश्रा
राघवेन्द्र मिश्रा

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने UGC के नए Anti-Discrimination नियमों को लेकर उठ रहे ‘Reverse Discrimination’ के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि Equity Regulations 2026 का उद्देश्य न्याय है, प्रतिशोध नहीं, और इनका कोई भी दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

UGC Equity Regulations 2026: नियम या नया रणक्षेत्र?

UGC के नए Equity Regulations 2026 ने देश के विश्वविद्यालयों को अचानक policy lab से protest zone में बदल दिया है। दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश तक, कैंपस में बहस सिर्फ किताबों की नहीं, बल्कि न्याय बनाम निष्पक्षता की हो चुकी है। सरकार इसे सामाजिक सुरक्षा कवच बता रही है, जबकि विरोधी इसे reverse discrimination manual कह रहे हैं।

शिक्षा मंत्री का स्टैंड: “डरने की जरूरत नहीं”

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने साफ शब्दों में कहा कि ये नियम किसी वर्ग को निशाना बनाने के लिए नहीं हैं। उनका कहना है कि यह पूरा framework संविधान और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के भीतर तैयार किया गया है। मंत्री ने यह भी जोड़ा कि discrimination रोकने के नाम पर harassment की इजाज़त किसी को नहीं दी जाएगी

यह बयान ऐसे समय आया है जब कई कॉलेजों में प्रदर्शन तेज़ हो चुके हैं और सोशल मीडिया पर #ReverseDiscrimination ट्रेंड कर रहा है।

नियमों में है क्या नया?

13 जनवरी को लागू हुए Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations 2026 के तहत हर यूनिवर्सिटी में 9-member Equity Committee बनाना अनिवार्य है।
इसमें SC, ST, OBC, Women और PwD प्रतिनिधित्व अनिवार्य। शिकायतों की fast-track सुनवाई। दोषी पाए जाने पर disciplinary action. सरकार का दावा है कि इससे historically marginalized students को safe academic space मिलेगा।

सवर्ण समाज की आपत्ति कहां अटकी?

विरोध करने वाले छात्रों का कहना है कि committee composition में General category के लिए कोई assured seat नहीं है। उन्हें डर है कि equity की परिभाषा इतनी लचीली है कि वह कभी भी weapon बन सकती है। सवाल उठ रहा है अगर शिकायत झूठी निकली तो आरोपी को कौन बचाएगा?

यहीं से भरोसे की दीवार में दरार दिखने लगी है।

कैंपस में Trust Deficit

एक ओर सरकार historical injustice की बात कर रही है, दूसरी ओर छात्र procedural safeguards की कमी गिना रहे हैं। irony ये है कि जिस policy का मकसद harmony है, वही policy campuses में suspicion पैदा कर रही है।

भारत में education reforms अक्सर syllabus से पहले society का टेस्ट लेते हैं। Equity Regulations भी शायद वही exam हैं Question: क्या हम न्याय और निष्पक्षता को साथ देख सकते हैं?
Answer: Depends on implementation, not intention.

UGC Equity Regulations 2026 एक sensitive लेकिन ज़रूरी पहल है। अब असली परीक्षा सरकार, संस्थानों और छात्रों—तीनों की है। अगर संवाद और पारदर्शिता नहीं बढ़ी, तो policy से पहले protest पास हो जाएगा।

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